उत्तराखंड

डीजी सूचना बंशीधर तिवारी की लोकप्रियता से घबराकर बदनाम करने की साजिश में जुटे चंद लोग

डीजी सूचना बंशीधर तिवारी की लोकप्रियता से घबराकर बदनाम करने की साजिश में जुटे चंद लोग

विज्ञापन में वायरल आरओ नियुक्ति से पहले का

पहली बार किसी सीएम को सूचना की सीढ़ियां चढ़ाने का श्रेय बंशीधर तिवारी को

पत्रकारों की कई मांगों पर लगी मुहर

देहरादून। सोशल मीडिया में दिल्ली की एक मैगजीन का रिलीज आर्डर अचानक से वायरल हुआ और इसका कोपभाजन बन गये डीजी सूचना बंशीधर तिवारी। मीडिया में कहा जाने लगा कि इस मैगजीन को जो लगभग 72 लाख का विज्ञापन दिया गया वह डीजी सूचना तिवारी ने दिया। यह रिलीज आर्डर जनवरी 2022 का है। यानी दो साल पुराना है। यह विज्ञापन 13 जनवरी 2022 में जारी हुआ और इसकी विज्ञापन राशि रूपये 71,99,992.80 है। जबकि डीजी सूचना पर बंशीधर तिवारी की नियुक्ति ही सितम्बर 2022 में हुई। ऐसे में माना जा सकता है कि कुछ लोग साजिशन डीजी सूचना को बदनाम करने में जुट गये हैं।

एक डीजी के तौर पर बंशीधर तिवारी ने पत्रकारों के लिए ऐसा काम किया जो राज्य गठन के बाद आज तक किसी भी सूचना महानिदेशक ने नहीं किया। उन्होंने मुख्यमंत्री धामी को सूचना विभाग में आमंत्रित किया और पत्रकारो के हितों के लिए तमाम योजनाएं बनाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने सीएम के सामने मीडिया के तीनों प्लेटफार्म के पत्रकारों के हितों की तीन मूल्यवान योजनाएं बनाई। इनमें पत्रकार कल्याण कोष में 5 करोड़ की जगह 10 करोड़ की वृद्धि, ग्रुप इंश्योरेंस व स्वतंत्र पत्रकार, राज्य पत्रकार, जिला पत्रकार के बाद अब तहसील स्तर पर तहसील पत्रकार भी मान्यता श्रेणी में रखे जाने को मान्यता देने का प्रावधान है। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, पोर्टल्स को भी उन्होंने यथासंभव विज्ञापन जारी किये हैं। उत्तराखंड के लघु एवं मध्यम इकाई की पत्र-पत्रिकाओं के हितों का भी ध्यान रखा जा रहा है। मासिक मैगजीन के संपादक को भी मान्यता प्रस्तावित है।

संभवतः यह बंशीधर तिवारी की लोकप्रियता को देखते हुए कुछ लोग उनको साजिशन डीजी पद से हटाने में जुटे हुए हैं और इसका मोहरा चंद पत्रकार बन गये हैं। पत्रकारिता बैलेंस होनी चाहिए। यदि किसी ने डीजी सूचना पर इतना गंभीर आरोप लगाया है तो पत्रकारेां को चाहिए था कि उनका पक्ष भी जान लिया जाता। बायस पत्रकारिता नहीं होनी चाहिए। आरोप लगाने वाले के साथ ही आरोपी का पक्ष भी होना चाहिए। यही पत्रकारिता का नियम है।

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